काॅम्प्लिमेंटस्
कुछ वर्ष पहले एक all women group के साथ दुबई प्रवास किया था। सभी महिलायें विभिन्न आयु गट की थी। सब अपने अपने ग्रुप के साथ थी। कुछ अकेली भी थी। इनमें एक सदस्या ऐसी थी जो हर ग्रुप के साथ enjoy कर रही थी। हालांकि वह उम्र में सबसे बडी थी मगर सबसे छोटी सदस्या के साथ भी उनकी दोस्ती थी। इसका कारण शायद यह था कि उन्हे हर एक में कोई न कोई गुण नजर आता था। वे हर किसी को कुछ न कुछ compliment जरूर देती थी। किसी के ड्रेस पर तो किसी के बालों पर तो किसी के स्माईल पर। मुझ से भी उन्होंने कहा, "अरे, कितना फास्ट चलते हो आप। कितनी एनर्जी है आपमें।" बस हो गई दोस्ती। Compliment किसे पसंद नही आता?
अब इसतरह सबकी तारीफ करने के पिछे उनका कोई स्वार्थ तो होगा नही क्यों कि enjoy करने के लिए उनका अपना ग्रुप था और सब जानते थे कि छह दिन बाद हर एक को अपने रास्ते निकलना है। शायद उनकी नज़र हि इतनी साफ थी कि केवल अच्छाई को हि परखती थी और दिल इतना बड़ा कि अच्छाई की तारीफ करने से अपने आप रोक नही पाती थी और बस माहौल खुशनुमा और दोस्ती भरा हो जाता था।
मार्क ट्वेन का कथन है, 'I can live for two months on a good compliment.' (मै एक अच्छी तारीफ पर दो महिने तक जिंदा रह सकता हूँ।) उन्होंने यह बात मजाकिया तौर पर कही ताकि यह समझाया जा सके कि सच्ची तारीफ या प्रशंसा, व्यक्ति को आनंद और प्रेरणा दे कर उसके आत्मविश्वास को बढ़ा सकती है। सच्चे मन से की हुई तारीफ सूर्यप्रकाश की तरह है जो किसी के जीवन में रोशनी ला सकती है। एक रीसर्च के अनुसार compliment देना और लेना दोनों हि मानसिक आरोग्य के लिए अच्छा है और शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक आरोग्य के साथ जुडा हुआ हि है।
अपने घर में हम लोग तारीफ कर के कई काम करवाते है। मेरे पतिने हमेशा आधी बाहों वाले शर्टस् पहने चाहे ऑफिस की मिटिंग हो या कोई पारिवारिक कार्यक्रम। बहू के आने के बाद वह खुद कपडे खरीद कर इनको देती है और शुरू हो जाती है, "वाह बाबा, बहुत अच्छे लग रहे हो। स्मार्ट लग रहे हो।" अब ये भी फुल स्लिव्ह शर्ट, जॅकेट सब पहनने लगे है।
हम किसी की छोटी सी छोटी गलती भी point out करते है। उसे दिखा देने में पिछे नही हटते। कुछ लोग इसे साफगोई का नाम देते है और अपने स्पष्टवक्ता होने का दम भरते है मगर किसी की प्रशंसा करते समय सोच में पड जाते है। कंजूस हो जाते है।
Compliment जैसे देना है वैसे हि शालीनता से उसका स्वीकार भी करना है। साथ हि प्रशंसा करने वाली व्यक्ति यदि कोई सूचना दे या टीका करें तो उसे भी खुले मन से हँसकर सुनना है और सकारात्मक प्रतिसाद देना है।
अपने आसपास भयंकर स्पर्धा और संघर्ष के कारण एक प्रकार की नकारात्मकता व्याप्त है। ऐसे में यदि हम सकारात्मक रूप से व्यक्त होते है तो यह सभी के लिए आनंददायक और लाभप्रद है। तारीफ या compliment एक ऐसा फूल है जो देनेवाले और स्वीकारने वाले दोनों के जीवन को सुगंधित करता है।
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